KAUWE AUR CHIDIYA KI KAHANI || KAHANI

KAUWE AUR CHIDIYA KI KAHANI || KAHANI

 

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कौवे छिड़िया की कहानी(kauwe aur chidiya ki kahani) .नमस्कार दोस्तो वैसे तो हम सभी ने बचपन में बहुत सी कहानियां(kahani) सुनी है और कई लोग उन कहानियों(kahani) पर अमल करते हैं। कई लोग उन कहानियों को बिल्कुल भूल चुके हैं आज हम बात करेंगे एक ऐसी कहानी के बारे में जिसे हमने सब ने बचपन में सुना है पर कुछ लोग भूल गए हैं। यह कहना तो सही नहीं होगा कि लोग उस कहानी को भूल गए हैं बल्कि बस समय-समय पर थोड़ा याद दिलाना जरूरी होता है। आज हम बात करेंगे सुस्त कौवे और चिड़िया के बारे में। दोस्तों मैं जानता हूं इस कहानी को आपने कई बार सुना है पर इस कहानी(kahani) को अच्छे तरीके से लिखा गया है तो मैं आपसे आशा करूंगा इस कहानी को आप पूरी तरीके से और पूरा पड़ेंगे। जिससे आपकी बचपन की यादें ताजा होंगी और यही मेरा मकसद है तो चलिए शुरू करते हैं।

 

कहानी(kahani) की शुरुआत 

 

कौवे और चिड़िया की कहानी(kauwe aur chidiya ki kahani)दोस्तों इस कहानी(kahani) की शुरुआत होती है एक कौवे से और एक चिड़िया से दोस्तों दोनों ही एक पेड़ की डाली पर रहा करते थे। दोनों के घोसले तो अलग-अलग थे पर एक दूसरी डाली पर था तो दूसरे का एक अलग डाली पर पर दोस्तों उन दोनों में गहरी मित्रता थी। तो वह साथ ही काम किया करते थे और साथ ही अपना जीवन व्यतीत किया करते थे दोस्तों  दोनों ने फैसला किया कि हम अपने खाने का इंतजाम सर्दी आने से पहले ही कर लेंगे। तो दोनों ने गर्मियों में फसल उगाने का फैसला किया पर दोस्तों  कौवा शुरू से ही बहुत ही सुस्त स्वभाव का प्राणी था। पर चिड़िया अपने काम को लेकर हमेशा सजग रहती थी और उसका मानना था जो कल करना है वही हमें आज करना है। तो उस काम को कल पर क्यों डालना वह आज ही सारा काम कर लेगी विचार चिड़िया से बिल्कुल विपरीत था। वह सोचता था आज करे सो कल कर कल करे सो परसो ईतनी भी क्या जल्दी है अभी तो पड़ी है तरसों। मतलब जो काम उसे कल करना था वह सोचता था वह कल करेगा कल की क्या जरूरत है कल को सोचता था कि वह परसों कर लेगा और परसों सोचता था कि वह अगले दिन कर लेगा तो यह के चरित्र का एक विवरण है कि कौवा बिल्कुल ही एक प्राणी था जो अपने काम के प्रति बिल्कुल भी सजग नहीं रहता था और वहीं दूसरी ओर चिड़िया बहुत ही सजग और मेहनती थी।

 

जब कौवा अपने आलस्य के कारण धोका खा गया 

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कौवे और चिड़िया की कहानी(kauwe aur chidiya ki kahani)दोस्तों जैसा कि दोनों के बीच में फैसला हुआ था कि वे सर्दी आने से पहले अपने खाने का इंतजाम पूरी तरीके से करके अपने घोंसले में रख लेंगे और सर्दी सर्दी आराम से निकलेंगे। तो इसी कारण उन्होंने खेती करने की सूची और फसल उगाने के फैसला किया दोस्तों इस फैसले को लेते ही चिड़िया उत्साह से भर गई और वह खेत की ओर जाने लगी। और कौए से बोली कि तुम भी चलो अपनी फसल के लिए खेत को जोतने। तो कौवा बोला हां तुम चलो और मैं आता हूं तो चिड़िया चली गई अपने खेत को जोतता आ गई। और कौवा 2 दिन बाद जाकर अपनी खेत जोतता आया  अब कुछ दिन बाद चिड़िया बोली कि  चलो जाकर अपने खेतों पर पानी लगाएं। अगर हम पानी ही नहीं लगाएंगे तो हमारे फसल खराब हो जाएगी और हम कुछ भी खा नहीं सकेंगे और हमारी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी।  कौवा बोला तू चल मैं आता हूं  चुपड़ी रोटी खाता हूं ठंडा पानी पीता हूं और हरी डाल पर बैठा हूं तो चिड़िया बोली कि ठीक है तुम अपना पानी लगाना मैं जब तक अपना पानी लगा कर आती हूं।

 

इसी बात को लेकर चिड़िया अपने खेत में पानी लगा कर आ गई और कौवा बोला अगर तुम चाहो तो मेरे खेत में भी पानी लगा  आओ और मैं भी तुम्हारी फसल काटने मैं मदद कर दूंगा। जब खेत में से फसल काटेंगे तो चिड़िया राजी हो गई और वह उसके खेत में जाकर उसके खेत में भी पानी लगा आयी। जिससे उन दोनों की फसलें थोड़ी देर दिनों बाद तैयार हो गई अब चिड़िया बोली कि चलो अपनी अपनी फसल काट कर ले आते है। और तुम भी कह रहे थे कि मेरी फसल काटने में तुम मेरी मदद करोगे। तो  कौवा बोला कि ठीक है तुम जाकर अपनी फसल काट लो मैं तो थोड़ी देर में जाऊंगा और वही अपना जुमला बोलता है तू चल मैं आता हूं चुपड़ी रोटी खाता हूं ठंडा पानी पीता हूं और हरी डाल पर बैठा हूं। चिड़िया बोलती है कि ठीक है डाल पर बैठे रहो मैं तो अपनी मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने दूंगी। मैं अपने हिस्से की फसल काट कर ले आती हूं जाती हैं खेत में से अपने हिस्से की फसल काट कर ले आती है और आराम से उसको एक जगह एकत्रित कर देती है सर्दियों में खाने पीने की कोई दिक्कत ना हो।

 

वह कौवे से एक बार फिर कहती है देखो तुम्हारी फसल खराब हो सकती है अब तो कई दिन हो चुके हैं तुम जाकर अपनी फसल काट क्यों नहीं लाते। अगर अभी काट लाओगे तो बाद में दिक्कत नहीं होगी और सर्दियों में आराम से तुम्हारी खाने का पूरा इंतजाम रहेगा तो ठीक रहेगा। पर कौवा फिर से अपना जुमला दोहराता देता है तू चल मैं आता हूं चुपड़ी रोटी खाता हूं ठंडा पानी पीता हूं और हरी डाल पर बैठा हूं। चिड़िया बोलती है अब मैं तो अब तुम जानो तुम्हारा काम जाने पर चिड़िया दिल की बहुत विनम्र होती है। वह फिर से कहती है देखो बारिश आने वाली है कुछ दिनों में बरसात पड़ने लगेगी जिससे तुम्हारी फसल पूरी तरीके से खराब हो जाएगी तुम जाओ और अपनी फसल को काट कर ले आओ। जिससे तुम्हारी मेहनत व्यर्थ ना हो दर्शन मेहनत चिड़िया की लगी थी क्योंकि उसके खेत में पानी दिया था और खेत की जुताई भी चिड़िया ने की थी।

 

कौवे और चिड़िया की कहानी(kauwe aur chidiya ki kahani)चिड़िया फिर से कहती है कि तुम जाकर अपनी फसल काटना बारिश पड़ेगी तो पूरी तरीके से नष्ट हो जाएगी तुम्हारे सर्दियों के लिए क्या इंतजार रहेगा और तुमसे और तुम्हें ठंड भी लगेगी। पर कौवा इसी बात पर कहता है कि कोई बात नहीं अभी बारिश का समय नहीं आया है। बारिश दो-तीन दिनों बाद आएगी उससे पहले मैं खिलाऊंगा चिड़िया कहती है कि तुम्हारी मर्जी है जो चाहे वह करो। अगले ही दिन मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है और कौवा देखता है कि अब मैं क्या करूं अब तो नाम इस बारिश में जा सकता ना फसल को काट कर ला सकता। वह बारिश इतनी भीषण होती है सारी की सारी कौवे की फसल नष्ट हो जाती है फिर से चिड़िया की तरफ देखता है। कौवा चिड़िया से कहता है देखो यह निर्दई मौसम ने मेरे फसल का क्या हाल कर दिया भगवान बहुत निर्दई है उसने मेरे साथ ठीक नहीं किया। फिर चिड़िया कहती है कि भगवान ने तो तुम्हारे लिए सारे साधन बना दिए थे। तुम्हें इस्तेमाल करना नहीं आया तुम्हारा जीवन आलस्य से ग्रस्त है जिसकी वजह से तुमने अपनी फसल को खो दिया है।

 

फिर क्या था चिड़िया आराम से बैठी बैठी सर्दियों में अपने आवाज को खाती रही और कौवा दर-दर की ठोकरें खाने के लिए इधर-उधर भटकने लगा। और यही सोचता रहा कि काश मैं अपनी फसल को एक या दो दिन पहले ही काट लाता तो आज मैं यूं दर दर की ठोकर ठंड में ठिठुर कर अपने खाने के लिए नहीं घूम रहा होता।

 

कहानी का निष्कर्ष(kauwe aur chidiya ki kahani) 

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तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी अपने काम को आगे के लिए नहीं डालना चाहिए। कार्य जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ही उसे निपटा दिया जाए। और धैर्य भी जरूरी है क्योंकि कई बार जल्दबाजी में काम गलत हो जाते हैं पर जो चीज बिल्कुल तैयार है और उसको करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। उस कार्य को जल्दी से जल्दी ही खत्म कर दिया जाना चाहिए और जो लोग यह कहते हैं कि भगवान गलत करता है। दरअसल भगवान कुछ भी गलत नहीं करता वह आपको सारी की सारी सुविधा इस प्रकृति के रूप में दे दी गई हैं। लेकिन आप अपने आलस्य की वजह से उसे इस्तेमाल ही नहीं कर पाते और भगवान को दोषी ठहराते हैं।

 

मित्रों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि आपको कभी भी आलस के कारण अपने कार्य को आगे के लिए नहीं छोड़ना चाहिए। आलस्य व्यक्ति के लिए शत्रु की तरह है अगर आपकी जीवन में आलस रहेगा तो आप कभी भी अपने जीवन में सफलता नहीं पा सकते। यदि हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाएं तो आप इस तरह समझ सकते हैं कि मान लीजिए आपकी एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। और आप यह सोचते हैं कि अभी तो 2 महीने हैं मैं आगे पढ़ लूंगा एक महीना है मैं आगे पढ़ लूंगा। और जब एग्जाम के एक दिन पहले ही आपको सारी किताबें याद करनी होती है तो आप उन्हें रटने में लग जाते हैं। जिनका असर यह होता है कि आपने अच्छी तरीके से रट के अगले दिन का एग्जाम तो दे आते हैं। परंतु जो आपने रखा है वह आगे के लिए आपको कंठ तरीके से याद नहीं हो पाता जिससे आपको आगे चलकर आने वाले आपके सिलेबस में काफी दिक्कत होती है। हमें अपने जीवन में यह प्रण कर लेना चाहिए कल करे सो आज कर आज करे सो अब अगर हम इस मूलमंत्र को अपने जीवन में अपना लेते हैं तो हमें कभी भी कोई भी परेशानी नहीं होगी और हम अपने जीवन में आगे बढ़ते चले जाएंगे।

 

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